लैला और मजनू
लैला मजनू की कहानी का इतिहास कई सदियों पुराना है। प्रसिद्ध कवि जमालुद्दीन इकबाल ने भी इस प्रेम कथा पर कई कविताएँ लिखी हैं। भारत और पाकिस्तान में कई फ़िल्में बनी हैं जो लैला मजनू पर आधारित हैं। हिन्दी, उर्दू, पंजाबी और अरबी में यह कहानी किताबों और कविताओं के रूप में भी पढ़ी जाती है। 🌹 कहानी का सार कुछ ऐसा है लैला और मजनू दो ऐसे प्रेमी थे, जिनका प्यार इतना गहरा था कि पूरी दुनिया के विरोध के बावजूद भी उन्होंने एक-दूसरे से अपना लगाव नहीं छोड़ा। लैला एक बहुत सुंदर लड़की थी, और मजनू (असली नाम क़ैस) एक ऐसा युवक था दोनों ने बचपन से ही एक-दूसरे को पसंद किया और प्यार करने लगे। लैला के माता-पिता ने उसकी शादी किसी और से तय कर दी। इससे मजनू पागल हो गया और जंगल में जाकर एकांतवास में रहने लगा। लोग उसे "मजनू" कहने लगे, जिसका अर्थ होता है "पागल प्रेमी"। मजनू अपनी मोहब्बत में इतना डूबा रहा कि उसने दुनिया से दूरी बना ली। वहीं, लैला भी अपने प्यार के लिए तड़पती रही। वर्षों की तड़पन के बाद दोनों की मौत हो गई, लेकिन उनकी प्रेम कहानी अमर हो गई। ऐसी प्रेम कहानी जो आज भी सभी को याद है.